घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला बनी आत्मनिर्भर
संघर्ष का ही दूसरा नाम जिंदगी है। जब तक सांसे चलती हैं संघर्ष अनवरत चलता है लेकिन संघर्ष और प्रताड़ना में फर्क होता है। महिलाएं अपने खिलाफ की गयी हिंसा को इस उम्मीद में बर्दाश्त करती हैं कि शायद एक दिन उनके जीवन में सब ठीक हो जाएगा। फिर धीरे-धीरे उन्हें यह बात समझ में आती है कि जीवन में सब तभी ठीक होगा जब वे खुद पहल करेंगी।
ऐसी ही जिंदगी दीया की है जिसने एक लम्बे समय तक अपने खिलाफ हुई घरेलू हिंसा का विरोध इस आस में नहीं किया कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा लेकिन जब हद हो गयी तो उसने महिला हेल्पलाइन 181 नम्बर पर शिकायत दर्ज कराई और ‘वन स्टॉप सेंटर’ नर्मदापुरम पर आई।
दीया ने बताया कि आए दिन उसे ससुराल में पीटा जाता है और उससे पैसों की डिमांड की जाती है। दीया के पति राकेश ने उसके सारे डॉक्यूमेंट्स भी जला दिए। दीया को परेशान करने के लिए उसके ससुराल में रोज नए हथकंडे अपनाए जाते। उसका पति उसे अश्लील वीडियो दिखाता। इन सबके बाद भी दीया उस रिश्ते को बचाने की जद्दोजहत में जुटी हुई थी। उसके इस जतन को उसका पति उसकी कमजोरी समझता रहा और गाहे-बगाहे उसे निकृष्ट बताते हुए कहता कि तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। वक्त बीतने के साथ-साथ दीया को यह बात समझ में आ गयी कि उसके रिश्ते में बचाने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।
उम्मीद का दामन छूटते ही दीया वन स्टॉप सेंटर नर्मदापुरम पहुंची और वहां की प्रशासक तथा परामर्श दात्री को अपने खिलाफ हो रही हिंसा की जानकारी दी। वन स्टॉप सेंटर में सबसे पहले दीया की काउंसलिंग की गयी। दीया ने बताया कि वह विधिक सहायता चाहती है। दीया को वन स्टाप सेंटर के द्वारा विधिक सहायता दिलाई गई।
इसी बीच कलेक्टर, नर्मदापुरम के मार्गदर्शन में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण तथा सिलाई प्रशिक्षण की ट्रेनिंग दी जा रही थी। जिसमें घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को 01 मार्च 2023 से 20 अप्रैल 2023 तक ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण दिया गया। क्योंकि पति से अलग होने के बाद दीया अपनी मां के साथ रह रही थी और उसे भरण-पोषण की समस्या से जूझना पड़ रहा था इसलिए उसने भी ब्यूटी पार्लर कोर्स का प्रशिक्षण पूरा किया। दीया को NRLM की सहायता से बैंक से लोन भी दिलाया गया। इस लोन से दीया ने अपना अपना ब्यूटी पार्लर खोल लिया है।
दीया बहुत खुश है। उसका कहना है कि मैंने सारी उम्मीद ही छोड़ दी थी मुझ लगा था पूरी जिंदगी यूं ही तिल-तिल के मरना पड़ेगा। मेरा पति भी कहता था कि तुम किसी लायक नहीं हो लेकिन वन स्टॉप सेंटर की मदद से मैं एक सम्माननीय और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हूं। पति से अलग होकर भी मेरा अपना एक अस्तित्व है। मैं किसी पर बोझ नहीं हूं। मेरा एक ब्यूटी पार्लर है और अब मैं अपने भरण-पोषण के लिए किसी पर निर्भर नहीं हूं।
