अमेरिकी दंपती ने बालिका को लिया गोद
- सतना, मध्यप्रदेश के मातृ छाया संस्था में पल रही थी बेटी
- कलेक्टर ने मातृछाया सेवा भारती में ईशानी को उसके नये माता-पिता को सौंपा
- सतना जिले के अब तक 47 बच्चों को गोद लेना का हुआ आदेश
मध्यप्रदेश के सतना में 28 अप्रैल 2024 रविवार को कलेक्टर अनुराग वर्मा ने मातृछाया सेवा भारती पहुंचकर गोद लेने के इच्छुक अमरीकी मूल के नागरिकों के हाथों में बच्ची ईशानी को सौंपा। कलेक्टर श्री वर्मा ने दत्तक ग्रहण की कार्यवाही पूर्ण कर्ते हुये इच्छुक दंपित्त से आवश्यक जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कानूनी रूप से स्वयं अभिभावकों के हाथों में बच्ची को सौंपते हुए उनसे बच्ची को कभी अनाथ नहीं समझने का वचन लिया। इस मौके पर मातृछाया के अध्यक्ष प्रदीप सक्सेना, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास सौरभ सिंह उपस्थित थे।
भारत सरकार द्वारा गोद लेने के लिए तैयार किये गए नियमों के अनुसार कोई भी इच्छुक व्यक्ति Website https://cara.wcd.gov.in/ पर जाकर आवेदन कर सकता है. Fit for Adoption बच्चों की सूची एवं जानकारी इस Website उपलब्ध होती है. ये बच्चे प्रायः अनाथ, लावारिश होते हैं, जो वर्तमान में बाल गृहों/ संस्थाओं में निवासरत होते हैं.
ऐसे ही संस्था सेवा भारती की मातृछाया में पल-बढ़ रही करीब 2 साल की अनाथ बच्ची को आखिरकार सात समंदर पार अमरीका में ममता की छांव मिल ही गई। गौरतलब है कि यह बच्ची नवंबर 2022 में पैदा हुई थी जिसे उसकी मां जिला अस्पताल में छोड़कर चली गई थी। जुलाई 2023 में अमेरिका के कोलोडिला शाहर में रहने वाले केन्ट मरीन और कैट मारिन ने इस बच्ची को ऑनलाइन पोर्टल पर देखा और मातृछाया एजेंसी से इस संदर्भ में बातचीत की कुछ टेस्ट और ईको करवाने के बाद माता-पिता ने इस बच्ची को लेने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की।
विशेष बात यह है कि कलेक्टर सतना द्वारा अपने कार्यकाल में अब तक 47 दत्तक ग्रहण के आदेश जारी कर बच्चों को गोद लेने के इच्छुक दम्पत्तियों को सौंपा जा चुका है। इनमें अप्रैल 2021 से मार्च 2022 में 7, अप्रैल 2022 से मार्च 2023 में 12 और अप्रैल 2023 से मार्च 2024 में 28 बच्चों के दत्तक ग्रहण आदेश जारी हुये हैं।
पहले गोद लेने वाले दंपत्ति को कलेक्टर न्यायालय में उपस्थित होना पड़ता था, लेकिन श्री वर्मा ने नई व्यवस्था लागू की. बच्चों को गोद लेने वाले दंपत्तियों को कलेक्टर न्यायालय में उपस्थित नहीं होना पड़े, इसके लिये स्वयं संबंधित संस्था में पहुंचकर दंपत्तियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर स्थिति के अनुसार बच्चों को गोद लेने वाले दंपत्तियों को सौंपते हैं।
