सखी ने मिलाया खोए हुए माता-पिता से बालिका को
(नोटः- सभी पात्रों के परिवर्तित नाम लिखे गये है)
‘वन स्टॉप सेंटर’ ने महिलाओं की हर सम्भव मदद करने का संकल्प लिया है और अपने इस अभियान को पूरा करने के लिए वह हर जिले में पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। कोई भी बाधा ‘वन स्टॉप सेंटर’ के संकल्प से बड़ा नहीं है। इसकी एक बानगी कुछ महीनों पहले सतना ‘वन स्टॉप सेंटर’ में देखने को मिली।
24 नवम्बर 2023 के दिन की शुरुआत आम दिनों की तरह ही हुई लेकिन बीतते घंटों के साथ दिन अनमना हो चला, दरअसल थाना नागौद पुलिस ने ‘वन स्टॉप सेंटर’ में एक राजरानी नाम की लड़की को भेजा। वह बच्ची बहुत घबराई हुई थी, उसके मुंह से बमुश्किल शब्द निकल रहे थे। वह क्या बोल रही थी, क्या कहना चाह रही थी किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। राजरानी को ‘वन स्टॉप सेंटर’ के अधिकारियों द्वारा सबसे पहले शांत कराया गया ताकि वह अपनी बात ठीक ढंग से रख सके। उस बच्ची को खाना, कपड़े आदि दिए गए साथ ही चिकित्सा सुविधा भी प्रदान की गयी।
यहां तक तो सब ठीक था लेकिन अब ‘वन स्टॉप सेंटर’ के सामने एक बड़ी चुनौती यह थी कि बच्ची की बात को समझा कैसे जाए क्योंकि राजरानी को सिर्फ बांग्ला भाषा ही आती थी। न तो ‘वन स्टॉप सेंटर’ की टीम उसकी बात समझ पा रही थी और न ही उसे अपनी बात समझा पा रही थी लिहाजा ‘वन स्टॉप सेंटर’ ने कुछ ऐसे लोगों से सम्पर्क साधा जो बांग्ला भाषा बोल सकते हों और समझ भी सकते हों ताकि वह बच्ची जो भी परेशानी बता रही है उसे समझकर जल्द से जल्द दूर किया जा सके साथ ही उस बच्ची को आश्वस्त भी किया जा सके कि ‘वन स्टॉप सेंटर’ बेहतर जगह है और वह पूरी तरह सुरक्षित है।
चुनौती बड़ी थी लेकिन बड़ी-बड़ी बाधाओं को पार करनेवाले ‘वन स्टॉप सेंटर’ के हौसलों के आगे यह चुनौती ज्यादा देर टिक नहीं पाई कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार एक ऐसे व्यक्ति को खोज निकाला गया जो बांग्ला भाषा जानते थे। उन्होंने उस बच्ची को भरोसा दिया कि वह सुरक्षित स्थान पर है और साथ ही आश्वस्त किया कि ‘वन स्टॉप सेंटर’ (सतना) उसे घर पहुंचाने में सहायता करेगी। उस बच्ची ने बांग्ला भाषा में अपना पता मेदनीपुर पश्चिम बंगाल और अपने घरवालों का नम्बर बताया। राजरानी के बताए नम्बर पर उसके माता-पिता से बात होने के बाद वन स्टॉप सेंटर की टीम ने राहत की सांस ली।
बालिका का घर दूर होने के कारण उसके पिता को वन स्टॉप सेंटर आने में समय लगा तब तक राजरानी के आश्रय, खाने-पीने की व्यवस्था वन स्टॉप सेंटर द्वारा की गई। अपने पिता को देखकर वह बहुत खुश हुई। अपर कलेक्टर सतना के आदेशानुसार राजरानी को उसके पिताजी के सुपुर्द कर दिया गया साथ ही उनके घर वापसी की व्यवस्था की गयी।
वन स्टॉप सेंटर की टीम की सजगता एवं अथक प्रयास से एक बच्ची को उसके माता-पिता से मिला दिया गया।
