आत्मनिर्भरता की ओर
वारासिवनी की 24 वर्षीय रश्मि बसेने (परिवर्तित नाम ) इन दिनों बालाघाट की सड़कों पर ई - रिक्शा चलाती नजर आती है. जीवन की परेशानियों और संघर्षों ने उन्हें नया बल दिया है और वह आत्म निर्भर हो गयी हैं । रश्मि बचपन से ही गरीब परिस्थितियों में पली बढ़ी। जब वो 22 वर्ष की थीं, उनका विवाह सामाजिक रीति रिवाज से राजेश बसेने (परिवर्तित नाम ) से हो गया । विवाह के कुछ दिन पश्चात् से पति एवं ससुराल पक्षों के द्वारा उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया । दहेज़ को लेकर शराब पीकर मारपीट करना, प्रताड़ित करना शुरू हो गया ।
इसी बीच रश्मि गर्भवती हो गई । ऐसे में प्रताड़ना से तंग आकर रश्मि मायके आ गई, जहाँ मायके पक्ष के द्वारा सम्पूर्ण डिलीवरी व बच्चे की देखभाल की गई, परंतु राजेश के द्वारा कोई खोज खबर नहीं ली गयी। वहीं रश्मि की बेटी एक वर्ष की अधिक हो जाने पर भी लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ नही ले पा रही थी |
रश्मि ने पति के परेशान करने का आवेदन पुलिस में दे दिया । पुलिस के द्वारा महिला को वन स्टॉप सेण्टर के बारे में जानकारी मिली और मार्च 2023 में रश्मि को वन स्टॉप सेण्टर भेजा गया । वन स्टॉप सेण्टर बालाघाट में रश्मि का पंजीयन कर 4 बार परामर्श दिया गया । इससे रश्मि को मानसिक संबल मिला । उसके कहने पर माह जुलाई 2023 में दहेज़ संबंधी हिंसा की FIR वारासिवनी थाना में दर्ज गयी । वन स्टॉप सेण्टर द्वारा न्यायालीन व निशुल्क अधिवक्ता सहायता लेकर घरेलु हिंसा का प्रकरण न्यायालय में दर्ज कराया गया ।
वन स्टॉप सेण्टर के माध्यम से छोटी बच्ची काव्या का लाडली लक्ष्मी योजना का विशेष प्रकरण दर्ज कराया गया इससे काव्या का लाडली लक्ष्मी योजना में पंजीयन हो गया । इतना ही नहीं इसी समय बालाघाट के एक एन. जी. ओ. द्वारा महिलाओं को ई -रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था । वन स्टॉप सेण्टर द्वारा रश्मि बसेने को अर्थिक रूप से सशक्त करने व जीविकोपार्जन हेतु ई -रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण माह जनवरी 2024 में दिलवाया गया ।
अब इन दिनों रश्मि द्वारा किराये पर ई -रिक्शा चलाया जा रहा है जिससे होने वाली आय से अपना और अपनी बच्ची का भरण पोषण कर रही है I रश्मि ने आत्मनिर्भरता की और कदम बढा दिया है ............................
